Vishwakarma Chalisa

Thursday, April 16, 2026

विश्वकर्मा चालीसा

(भगवान विश्वकर्मा जी की स्तुति)

दोहा
श्री विश्वकर्मा चरण कमल, धरहु ध्यान मन माहिं।
सकल सृष्टि के रचयिता, जय-जय प्रभु जय वाहि।।

चौपाई
जय जय श्री विश्वकर्मा भगवान,
सृष्टि रचाई कीनी जग जान।
धर्म स्थापक कला के धनी,
तेरी महिमा गावत चतुर गुणी।

सुदर्शन चक्र रचकर दियो,
धर्म मार्ग को सदा स्थिर कियो।
इन्द्रपुरी और लंका सजाई,
द्वारिका को भी सुन्दर बनवाई।

हर शिल्प में तेरा है वास,
तुमसे बनता सृष्टि का प्रयास।
अद्भुत सृजन की छवि न्यारी,
तुम हो जग के शिल्प अधिकारी।

रथ, विमान और भवन रचाए,
जिनसे देवता सुख पाये।
तव आराधना जो नर करिही,
सुख, समृद्धि और यश धरिही।

तुम हो जग के पालनहारे,
दीन-दुखी के संकट टारे।
विश्वकर्मा चालीसा जो गावे,
मनवांछित फल सहज ही पावे।

सृष्टि में तव कला का विस्तार,
तेरा यश गाये संसार।
शरणागत की लाज बचावे,
कृपा दृष्टि सब पर बरसावे।

दोहा
विश्वकर्मा चालीसा जो, भक्त हृदय से गाव।
सुख-संपत्ति और यश, नित हर घर में पाव।।


 

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