Surya Chalisa

Friday, February 13, 2026

॥ श्री सूर्य चालीसा ॥

दोहा
श्री गणपति गुरु गौरि पद, बंदि करौं सुरराज।
जासु प्रकाश हरि तमहिं, अरुन करत सब काज॥

चौपाई

जय जय जय जगत प्रकासक।
जयति तेज-मूल भव नाशक॥
सप्त अश्वरथ भास्कर धावै।
दिनकर नाम सकल जग गावे॥

जपित अरुण ओम जय जय श्री।
मम दरिद्रता हरहु रबि हरि॥
आदि ज्योति जग के तुम राजा।
वेद प्रकासक सृष्टि के साजा॥

पिंगल, भानु, दिवाकर, रावी।
सप्त नाम निज माहि समावी॥
करै आप प्रभु काल गति भ्राता।
त्रिदिन ताप हरहु जग त्राता॥

ग्रहदशा में तिहु गति कारक।
जनमाशा प्रभु धर्म प्रचारक॥
भानु सकल शुभ काज बिधाता।
तुम बिनु जड़ सब श्रम जाता॥

दीन के तुम ही हो सहारे।
तुम बिनु होत न उजियारे॥
ध्यान तुम्हारौ जो नर करहीं।
चिरायु, सुख-सम्पत्ति भरहीं॥

भय हरि सकल सुकृत के दाता।
सूरज प्रभु जयति जग त्राता॥
हरित ऋतु फल जग को दीन्हा।
प्रभु तेहि बल से तप बल कीन्हा॥

जोग ध्यान तप सूर्य प्रकासा।
सकल श्रुति प्रणमति सब आसा॥
भानु तेज जुग कारन कारी।
तम हरि सुर नर मुनि सुखकारी॥

आरोग्य-सम्पत्ति सुन्दर काया।
जो याचक प्रभु तुमसे पाया॥
दीनन के जय दयालु सहायक।
सकल सुकृत फल दायक नायक॥

कश्टनाशक जयति तेज भानु।
जयति वेद प्रकासक दिनमनि धनु॥
सप्त अश्वरथ रबि प्रभु धावे।
निज प्रभु नाम सकल नर गावे॥

भानु चालीसा जो नर गावे।
तिनहि कष्ट निकट नहि आवे॥
सूरज प्रभु सब कष्ट मिटावा।
चालीसा व्रत पाठ करावा॥

दोहा
जो यह पाठ करे प्रभु, सुर्य चालीसा जाप।
नहिं कष्ट आयु, आरोग्य, समृद्धि उत्तम ताप॥


 

Shopping Cart

Offering Cart