Ram Chalisa
Thursday, April 16, 2026
राम चालीसा
(भगवान श्रीराम जी की स्तुति)
दोहा
श्री राम चंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्।
नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्।।
चौपाई
जय रघुनंदन जयति गुण सागर,
जय कपी वल्लभ जयति जग पालक।
जानकी वल्लभ राम तुमारे,
नाम जपै नर भवसागर तारे।
तुम हो अवधपति रघुकुल तिलक,
रामनाम गुण गावै चहुं दिश।
दीनबंधु दयालु कृपालू,
हरहु संताप मिटावहु कालू।
तुम हो ब्रह्मा विष्णु महेश्वर,
राम रूप धरि भए जगेश्वर।
सुमिरन कर जो भक्त तुम्हारा,
उनके दुख को हरहु कुमारा।
वनवासी बन कर तुम आये,
रावण वध कर धर्म सिखाये।
सीता हरण करि लंका जाई,
दशानन के संग युद्घ लड़ाई।
हनुमत बल से लंका जलाई,
सीता माई को सुध लवाई।
रावण वध करि भक्त बचाये,
श्रीराम जी सबको सुखदाय।
शरणागत की लाज बचाई,
करुणा सिंधु सब दुख हराई।
राम चालीसा जो कोई गावे,
मनवांछित फल सहज ही पावे।
दोहा
श्रीराम जी की शरण में, जो भी आये आप।
दीनदयालु कृपा कर, दे सुख अनवरत जाप।।